गीत वितान कला केंद्र ने मनाया ३२वां वसंत उत्सव, भिलाई नगर में

संगीत, नृत्य, चित्रकला एवं वादन प्रशिक्षण के लिए प्रसिद्ध गीत वितान कला केंद्र द्वारा 32वां वसंत उत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ शांतिनिकेतन की तर्ज पर स्वामी आत्मानंद उद्यान, मरोदा सेक्टर, भिलाई में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के मुख्य संरक्षक श्री नरेंद्र कुमार बंछोर, श्री वी.के. मोहम्मद, श्री वंश बहादुर सिंह (महासचिव, इंटक), कला-साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री शक्ति चक्रवर्ती, श्री शांतनु दास गुप्ता एवं मुख्य सलाहकार डॉ. आर.के. सोणवणे एवं श्री गोविंद पाल, श्री मनोज ठाकरे ( अध्यक्ष सैल्यूट तिरंगा संगठन) तथा संगठन की अध्यक्ष श्रीमती रजनी सिन्हा द्वारा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर एवं मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

इस अवसर पर नगर पालिका निगम रिसाली के सभापति श्री केशव बंछोर को शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर “वसंत वंदना 2026” से सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण संस्था के श्री नरेंद्र बंछोर द्वारा प्रस्तुत किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल की परंपरा के अनुसार रवीन्द्र संगीत एवं नृत्य “ओरे गृहवासी खोल द्वार खोल” से हुई। इस प्रस्तुति में छात्र-छात्राओं ने गुलाल उड़ाते हुए पदयात्रा कर वातावरण को पूर्णतः बसंती रंग में रंग दिया। इसके पश्चात वसंत ऋतु पर आधारित गीत, नृत्य एवं काव्य पाठ प्रस्तुत किए गए।
चित्रकला के विद्यार्थियों ने कैनवास पर प्रकृति के अलग-अलग रंगों को खूबसूरती से चित्रित कर विशेष आकर्षण प्रस्तुत किया। वहीं वादन समूह ने गिटार, कीबोर्ड एवं अन्य वाद्य यंत्रों के साथ “मां सरस्वती शारदे” गीत की मनमोहक प्रस्तुति दी। हारमोनियम पर संगत श्रीमती चंद्रा बनर्जी, तबले पर रूद्र प्रसन्न जेना, गिटार पर डेनिल कोसरिया, अमन बराडे एवं धैर्य हंस, बांसुरी पर मनीष वर्मा तथा कीबोर्ड पर हर्ष सोनटके ने उत्कृष्ट सहयोग दिया।
कार्यक्रम का नृत्य एवं संगीत निर्देशन नृत्यमणि गुरु मिथुन दास द्वारा किया गया। मंच संचालन श्रीमती रचना श्रीवास्तव एवं माया बनर्जी ने किया, जबकि काव्य पाठ सुपर्णा चक्रवर्ती एवं शीबेन हालदार द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस आयोजन को सफल बनाने में प्रदीप कुमार मित्रा, अस्मिता बनर्जी, सुब्रत विकास चौधरी, प्रेमचंद साहू, हर्षदेव साहू, पुरुषोत्तम, राजिल वर्मा, सौरव चक्रवर्ती, सुरेंद्र साहू एवं जयप्रकाश मिश्रा का विशेष सहयोग रहा।
यह आयोजन न केवल कला और संस्कृति का उत्सव बना, बल्कि प्रकृति और परंपरा के सुंदर समन्वय का भी सजीव उदाहरण प्रस्तुत किया।

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