वर्षा मंगल गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा वर्ष 1934 में रचित एक अनुपम संगीत-नृत्य काव्य है। वर्षा ऋतु की सौंदर्य-चेतना, प्रकृति के उल्लास और मानव जीवन के साथ उसके आत्मीय संबंध को अभिव्यक्त करने वाली इस अद्वितीय प्रस्तुति में 22 गीतों का समावेश है। यह केवल एक सांगीतिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत उत्सव है।
गुरुदेव के चिंतन में वर्षा मंगल का वृक्षारोपण से गहरा और पावन संबंध है। उनके लिए वृक्ष केवल प्रकृति का अंग नहीं, बल्कि जीवन, सृजन और भविष्य का प्रतीक हैं। इसी भाव को साकार करते हुए शांतिनिकेतन (विश्वभारती विश्वविद्यालय) में आषाढ़ एवं श्रावण मास के दौरान वर्षा मंगल और वृक्षारोपण उत्सव आज भी अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता हैं। यह परंपरा मानव और प्रकृति के शाश्वत सहअस्तित्व का संदेश देती है।
इसी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को आत्मसात करते हुए गीतवितान कला केन्द्र,भिलाई गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर “वर्षा मंगल” की संगीतमय एवं नृत्यमय प्रस्तुति आयोजित कर रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य प्रकृति के प्रति श्रद्धा, हरियाली के संरक्षण, सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन तथा गुरुदेव की अमर कला-दृष्टि को जन-जन तक पहुँचाना है।
इस गरिमामय सांस्कृतिक संध्या का आयोजन शनिवार, 08 अगस्त को संध्या 7:00 बजे, प्रगति भवन, सिविक सेंटर, भिलाई में किया जा रहा है। प्रकृति, संगीत, नृत्य और गुरुदेव की अमर सृजनधारा के इस अनुपम उत्सव में आपकी स्नेहिल एवं गरिमामयी उपस्थिति हमारे लिए प्रेरणा और सौभाग्य का विषय होगी।
आइए, हम सब मिलकर संगीत, प्रकृति और संस्कृति के इस दिव्य संगम के साक्षी बनें तथा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की अमर विरासत को सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित करें।
आप सादर आमंत्रित हैं।